युवाओं और प्रशासन के बीच बना संवाद का मजबूत मंच, “कॉफी विद कलेक्टर” कार्यक्रम में करियर, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी पर हुई खुली चर्चा
जशपुर में युवाओं को मिली नई दिशा
![]() |
| कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ.लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार |
आज के दौर में युवाओं को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें सही मार्गदर्शन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक व्यवस्था की समझ देना भी बेहद आवश्यक हो गया है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में जशपुर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, UNICEF और एग्रीकोन सर्वहितम के संयुक्त सहयोग से आयोजित “कॉफी विद कलेक्टर” कार्यक्रम एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं था, बल्कि युवाओं और प्रशासन के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग का ऐसा मंच था, जिसने युवाओं के भीतर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया।
मंगलवार को जिला कलेक्टर सभाकक्ष में आयोजित यह कार्यक्रम पूरे जिले के लिए प्रेरणा का विषय बन गया। जिले के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे युवा स्वयंसेवकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से खुलकर चर्चा की, अपने विचार रखे और भविष्य को लेकर मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, जिज्ञासा और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ था।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
![]() |
| जय हो संगठन के स्वयंसेवकों की उपस्थिति |
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। भारतीय संस्कृति में दीप प्रज्वलन ज्ञान, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं छत्तीसगढ़ी गमछा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इस पारंपरिक स्वागत ने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा और आत्मीयता से भर दिया।
जिला समन्वयक शालिनी गुप्ता ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि “कॉफी विद कलेक्टर” का उद्देश्य युवाओं को प्रशासन के करीब लाना, उनके भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करना और समाज निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि युवा यदि सही दिशा में आगे बढ़ें तो वे समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रोहित व्यास उपस्थित रहे। उनके साथ अभिषेक कुमार, डॉ. लाल उमेश सिंह, समग्र शिक्षा विभाग से दीपा मैम, महिला एवं बाल विकास विभाग से अंजना चौहान, मीडिया
प्रतिनिधि तरुण प्रकाश शर्मा, विकास पाण्डेय, पार्वती चौहान और रवि गुप्ता विशेष रूप से मौजूद रहे।इसके अतिरिक्त संगवारी संस्था, ओपन लिंक फाउंडेशन अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों और अधिकारियों ने युवाओं के साथ अनुभव साझा किए और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं ने खुलकर रखे अपने सवाल
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि यहां युवाओं को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिला। जिले के आठों विकासखंडों से आए स्वयंसेवकों ने करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा, सामाजिक चुनौतियों, रोजगार, तकनीक, नेतृत्व और समाज सेवा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल पूछे।
युवाओं ने प्रशासनिक अधिकारियों से यह भी जानना चाहा कि वे अपने गांव और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए क्या कदम उठा सकते हैं। अधिकारियों ने बेहद सहज और सरल तरीके से युवाओं के प्रश्नों का उत्तर दिया। इससे युवाओं में प्रशासन के प्रति विश्वास और जुड़ाव और अधिक मजबूत हुआ।
यह संवाद केवल प्रश्न और उत्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी चर्चा में बदल गया जिसमें युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए और अधिकारियों ने उन्हें व्यावहारिक जीवन से जुड़े सुझाव दिए।
कलेक्टर रोहित व्यास ने युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
अपने संबोधन में कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। यदि युवाओं को सही दिशा, अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में कठिनाइयां आना स्वाभाविक है, लेकिन जो व्यक्ति निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ता है वही सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने सकारात्मक सोच, अनुशासन और मेहनत को सफलता की कुंजी बताया।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशासन तभी मजबूत बनता है जब समाज और युवा उसके साथ मिलकर काम करें। उन्होंने युवाओं को समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम करने, शिक्षा को बढ़ावा देने और सामाजिक जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।
करियर मार्गदर्शन बना चर्चा का प्रमुख विषय
आज के समय में युवा सबसे अधिक जिस विषय को लेकर चिंतित रहते हैं, वह है करियर। कार्यक्रम में यह विषय प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सरकारी नौकरियों, निजी क्षेत्र के अवसरों, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा के बारे में सवाल पूछे।
अधिकारियों ने युवाओं को बताया कि केवल नौकरी पाना ही सफलता नहीं है, बल्कि अपने कौशल को विकसित कर समाज के लिए उपयोगी बनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युवाओं को समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण और निरंतर अध्ययन के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया गया।
युवाओं को यह भी बताया गया कि आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और तकनीकी कौशल का उपयोग कर वे नए अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि एक अच्छा नेता वही होता है जो समाज की समस्याओं को समझे और समाधान के लिए आगे आए।
युवाओं को टीमवर्क, संवाद कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और समाज के प्रति जिम्मेदारी को नेतृत्व की मुख्य विशेषताएं बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि गांव और समाज में छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
इस दौरान कई युवाओं ने अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी भी साझा की, जिसकी अधिकारियों ने सराहना की।
“युवोदय ऐप” बना युवाओं की सक्रियता का माध्यम
कार्यक्रम में “युवोदय ऐप” की विशेष चर्चा रही। अधिकारियों ने बताया कि यह ऐप युवाओं और स्वयंसेवकों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने और उनकी सक्रियता का मूल्यांकन करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
स्वयंसेवक अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक कार्यों, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक गतिविधियों की जानकारी ऐप पर अपलोड करते हैं। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन से युवा समाज के लिए बेहतर कार्य कर रहे हैं।
यह पहल युवाओं को केवल प्रेरित ही नहीं करती, बल्कि उन्हें जिम्मेदारी और जवाबदेही का भी एहसास कराती है।
उत्कृष्ट स्वयंसेवकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में उन युवाओं को विशेष सम्मान दिया गया जिन्होंने सामाजिक कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया। जशपुर जिले से शालू गुप्ता, नेहा एक्का, रिंटा गुप्ता और दिव्या को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मान प्राप्त करने वाले युवाओं ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और इससे उन्हें आगे भी समाज सेवा के लिए नई ऊर्जा मिलेगी।
कार्यक्रम में सम्मानित युवाओं की उपलब्धियों ने अन्य प्रतिभागियों को भी प्रेरित किया।
ऑटो चालक रुस्तम बने सेवा भावना की मिसाल
कार्यक्रम में समाज सेवा और स्वयंसेवकों के सहयोग में सदैव सक्रिय रहने वाले ऑटो चालक रुस्तम को भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक था कि समाज सेवा केवल बड़े पद या संसाधनों से नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और मदद की भावना से होती है।
रुस्तम जैसे लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को मानवीय संवेदनाओं से भर दिया। यह संदेश दिया गया कि समाज में हर व्यक्ति अपने स्तर पर बदलाव ला सकता है।
बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर विशेष चर्चा
महिला एवं बाल विकास विभाग की अंजना चौहान ने बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बाल सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए समुदाय की भागीदारी को बेहद जरूरी बताया।
स्वयंसेवकों को मिलेगा प्रशासन का सहयोग
जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार ने स्वयंसेवकों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनके हर सकारात्मक प्रयास में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि यदि स्वयंसेवक अपने कार्यक्रमों की जानकारी पहले से प्रशासन को देंगे तो बेहतर समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे गांवों में शिक्षा, स्वच्छता, पोषण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएं।
सड़क सुरक्षा अभियान में युवाओं की भूमिका
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेश सिंह ने युवाओं को सड़क सुरक्षा अभियान में भागीदारी निभाने और “पुलिस मितान” बनकर समाज में सकारात्मक योगदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए युवाओं की जागरूकता बेहद जरूरी है। हेलमेट पहनना, यातायात नियमों का पालन करना और दूसरों को भी जागरूक करना समाज के प्रति जिम्मेदारी का हिस्सा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन युवाओं को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग देने के लिए हमेशा तैयार है।
समाज निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका
कार्यक्रम में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि समाज और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि युवा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें तो समाज की कई समस्याओं का समाधान संभव है।
युवाओं को केवल करियर तक सीमित न रहकर समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि एक जागरूक युवा ही मजबूत समाज की नींव बनता है।
संवाद से बढ़ता है विश्वास
“कॉफी विद कलेक्टर” कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता यही रही कि इसने युवाओं और प्रशासन के बीच विश्वास का एक मजबूत पुल तैयार किया। आमतौर पर युवा प्रशासनिक अधिकारियों से दूरी महसूस करते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम ने उस दूरी को कम करने का कार्य किया।
जब युवा सीधे अधिकारियों से बात करते हैं, अपने सवाल रखते हैं और समाधान प्राप्त करते हैं, तो उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। यह संवाद लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में शालिनी गुप्ता, विकासखंड समन्वयक गुरुदेव प्रसाद और पंकज यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके समन्वय और अथक प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
सभी स्वयंसेवकों और सहयोगी संस्थाओं ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया। कार्यक्रम में अनुशासन, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा साफ दिखाई दे रही थी।
युवाओं के लिए क्यों जरूरी हैं ऐसे कार्यक्रम
आज के समय में युवा कई चुनौतियों से गुजर रहे हैं। करियर का दबाव, सामाजिक अपेक्षाएं, प्रतियोगिता और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं युवाओं को प्रभावित करती हैं। ऐसे में “कॉफी विद कलेक्टर” जैसे कार्यक्रम युवाओं को सही दिशा और प्रेरणा देने का काम करते हैं।
इन कार्यक्रमों से युवाओं को यह महसूस होता है कि प्रशासन और समाज उनके साथ खड़ा है। इससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
जशपुर बना प्रेरणादायक मॉडल
यह कार्यक्रम केवल जशपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य और देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है। यदि हर जिले में युवाओं और प्रशासन के बीच ऐसे संवाद आयोजित किए जाएं तो समाज में सकारात्मक बदलाव की गति और तेज हो सकती है।
युवाओं को अवसर और मंच देना किसी भी समाज के विकास के लिए जरूरी है। जशपुर का यह प्रयास निश्चित रूप से अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनेगा।
“जय हो जशपुर” के नारों के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में स्वयंसेवकों ने इसे प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और भविष्य के लिए उपयोगी पहल बताया। पूरे सभाकक्ष में “जय हो जशपुर” के नारों की गूंज सुनाई दी।
युवाओं के चेहरे पर आत्मविश्वास, उत्साह और नई उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासन और युवा साथ आते हैं तो बदलाव की नई कहानी लिखी जा सकती है।
निष्कर्ष
“कॉफी विद कलेक्टर” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं और प्रशासन के बीच मजबूत संवाद, विश्वास और सहभागिता का सशक्त मंच बनकर उभरा। इस आयोजन ने युवाओं को यह एहसास कराया कि वे केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के भी महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
करियर मार्गदर्शन, नेतृत्व विकास, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक सहयोग जैसे विषयों पर हुई खुली चर्चा ने युवाओं को नई सोच और नई दिशा दी। जशपुर में आयोजित यह कार्यक्रम निश्चित रूप से आने वाले समय में युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।











