जशपुर में प्रेमचंद जयंती पर गूंजी ‘सवा शेर गेहूं’ : 380 से अधिक विद्यार्थियों ने साहित्य, संवेदना और सृजनात्मकता का मनया उत्सव
जशपुर। साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर जशपुर में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना का एक प्रेरणादायी संगम देखने को मिला। प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) जिला इकाई कुनकुरी-जशपुर के सचिव एवं उभरते युवा लेखक-कवि श्री मुकेश कुमार के अथक प्रयास, दूरदर्शी संयोजन और साहित्य के प्रति समर्पित सोच के परिणामस्वरूप स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय, जशपुर में भव्य साहित्यिक आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को संवेदनशील, न्यायप्रिय और मानवीय बनाने की अद्भुत शक्ति रखता है।
इस आयोजन में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से 380 से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक, प्राध्यापक एवं साहित्यप्रेमी शामिल हुए। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गम्हरिया, सरस्वती शिशु मंदिर, देव पब्लिक स्कूल, स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय, स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, सेजेस हिन्दी माध्यम विद्यालय, एम.एल.बी. कन्या विद्यालय तथा एन.ई.एस. महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों की उल्लेखनीय सहभागिता ने कार्यक्रम को जिले का एक महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजन बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत गीत एवं स्वागत नृत्य से हुआ, जिसकी मनमोहक प्रस्तुति स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक प्राध्यापक सुश्री कीर्ति किरण केरकेट्टा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने वाली वैचारिक धरोहर है। उन्होंने विद्यार्थियों से साहित्य को जीवन से जोड़ने और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली आकर्षण मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘सवा शेर गेहूं’ का सजीव वाचन रहा। श्रीमती ज्योति शाहनी बाघव ने अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रस्तुति से कहानी के पात्रों, उनके संघर्ष और सामाजिक यथार्थ को इस प्रकार जीवंत किया कि पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो गया। विद्यार्थियों ने कहानी के माध्यम से ग्रामीण जीवन, शोषण, असमानता और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से महसूस किया।
इसके पश्चात प्रेमचंद के जीवन, साहित्य और विचारों पर आधारित लिखित एवं मौखिक क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में सेजेस हिन्दी माध्यम विद्यालय ने प्रथम स्थान, सेजेस हिन्दी माध्यम विद्यालय ने द्वितीय स्थान तथा एम.एल.बी. कन्या विद्यालय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम में गायक लेखक एवं वादक श्री राजेंद्र प्रेमी के द्वारा हारमोनियम तबला के साथ मनमोहक प्रस्तुति दी गई जिसमें राठौर सर जी का विशेष सहयोग रहा
व्यक्तिगत लिखित क्विज प्रतियोगिता में जागृति साहू (सरस्वती शिशु मंदिर) ने प्रथम स्थान, आर्शी सिमरन (सेजेस इंग्लिश माध्यम विद्यालय) ने द्वितीय स्थान तथा पूर्वी नाग, मेघा कुमारी, आदर्श प्रधान एवं शम्भूनाथ ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं मौखिक क्विज प्रतियोगिता में सेजेस हिन्दी माध्यम विद्यालय प्रथम, एम.एल.बी. जशपुर द्वितीय तथा देव पब्लिक स्कूल एवं स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे।
कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि मौलिक कहानी लेखन एवं कहानी-संकलन प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। सभी विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस पहल ने विद्यार्थियों में साहित्य सृजन और रचनात्मक लेखन के प्रति विशेष उत्साह का संचार किया।
शोध संवाद सत्र में श्रीमती अनीता गुप्ता एवं श्रीमती सीमा गुप्ता ने प्रेमचंद के साहित्य में ग्रामीण यथार्थ, वर्ग-संघर्ष, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समाज को समझने, बदलने और बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है। आज के समय में भी उनकी रचनाएँ उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके जीवनकाल में थीं।
इस अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ की जिला अध्यक्ष डॉ. कुसुम माधुरी टोप्पो ने विद्यार्थियों को सृजनात्मक लेखन, साहित्य अध्ययन और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज में संवेदना, सकारात्मक सोच और रचनात्मक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, लेखन और साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री डमरूधर स्वर्णकार ने अपनी प्रभावशाली एवं सहज शैली में किया। पूरे आयोजन में उनकी प्रभावपूर्ण प्रस्तुति ने कार्यक्रम को गरिमामय बनाए रखा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रगतिशील लेखक संघ जिला इकाई कुनकुरी-जशपुर की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन के संयोजक श्री मुकेश कुमार ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्य तभी सार्थक होता है जब वह समाज में संवेदना, विचार और सकारात्मक परिवर्तन की चेतना जगाए। उन्होंने भविष्य में भी विद्यार्थियों के बीच साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
आयोजन को सफल बनाने में शोधार्थी नंजू कुमारी एवं शोधार्थी शालिनी गुप्ता का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। दोनों शोधार्थियों ने कार्यक्रम के समन्वय, व्यवस्थाओं तथा विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।
समापन अवसर पर विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाएँ आयोजन की सफलता का प्रमाण बनीं। एक छात्रा ने कहा, “‘सवा शेर गेहूं’ को पहली बार इस तरह सुना, जैसे कोई हमारी आत्मा से संवाद कर रहा हो।” वहीं एक छात्र ने कहा, “अब प्रेमचंद केवल पाठ्यपुस्तकों में नहीं, बल्कि हमारे विचारों और जीवन का हिस्सा बन गए हैं।”
प्रेमचंद जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक स्मृति समारोह नहीं था, बल्कि साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना का ऐसा सशक्त अभियान बन गया जिसने नई पीढ़ी को पढ़ने, सोचने, लिखने और समाज के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी। जशपुर ने इस आयोजन के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि जब विद्यालय, साहित्यकार और विद्यार्थी एक मंच पर आते हैं, तब साहित्य केवल शब्द नहीं रहता, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन जाता है।
































