जशपुर कॉलेज में जीवंत हुआ मुंशी प्रेमचंद का 'पंच परमेश्वर'

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जशपुर महाविद्यालय में जीवंत हुआ मुंशी प्रेमचंद का ‘पंच परमेश्वर’


अंज़ीम प्रेम जी फाउंडेशन एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में नाट्य मंचन, न्याय और लोकतंत्र का दिया संदेश

जशपुर। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर शासकीय रामभजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुर में उनकी कालजयी कहानी ‘पंच परमेश्वर’ का प्रभावशाली एवं भावपूर्ण नाट्य मंचन अंजीम प्रेम जी फाउंडेशन, मनोरा एवं महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहाँ विद्यार्थियों एवं उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने प्रेमचंद के यथार्थवादी साहित्य और उनके मानवीय मूल्यों को मंच पर साकार रूप में देखा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र, सहायक प्राध्यापक डॉ. उषा किरण लकड़ा, डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, महाविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री भगत राम भारद्वाज, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, जशपुर के जिला समन्वयक एवं प्रगतिशील लेखक संघ के जिला सचिव श्री मुकेश कुमार, वरिष्ठ गीतकार, कवि एवं वादक श्री राजेंद्र प्रेमी, अंजीम प्रेम जी फाउंडेशन से मुकेश जी , मनोरा विकासखंड के शिक्षक-शिक्षिकाएँ तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष सुश्री कीर्ति किरण केरकेट्टा ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में भारतीय समाज की वास्तविक समस्याओं, ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमताओं और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत यथार्थवादी ढंग से चित्रित किया। उनके उपन्यास एवं कहानियाँ आज भी समाज को सत्य, न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेमचंद की प्रमुख रचनाओं एवं साहित्यिक योगदान से भी अवगत कराया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र ने हिन्दी विभाग एवं अंजीम प्रेम जी फाउंडेशन की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की आत्मा का सजीव चित्रण करता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि, सामाजिक चेतना एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


इसके पश्चात अंजीम प्रेम जी फाउंडेशन के श्री मुकेश जी के निर्देशन में मनोरा विकासखंड के शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम द्वारा ‘पंच परमेश्वर’ का सशक्त नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय, प्रभावशाली संवाद एवं भावपूर्ण प्रस्तुति से कहानी के प्रत्येक दृश्य को साकार कर दिया।

‘पंच परमेश्वर’ प्रेमचंद की सर्वाधिक चर्चित कहानियों में से एक है। कहानी के मुख्य पात्र जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की गहरी मित्रता तब परीक्षा की कसौटी पर खड़ी होती है, जब दोनों को अलग-अलग अवसरों पर पंचायत में न्याय करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। पंच के आसन पर बैठते ही वे मित्रता, पक्षपात और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर केवल न्याय का पक्ष लेते हैं। प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से यह अमर संदेश देते हैं कि "पंच के पद पर बैठते ही व्यक्ति की वाणी में परमात्मा का वास हो जाता है।" नाट्य मंचन ने इस संदेश को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।


नाट्य मंचन में मनोरा विकासखंड के शिक्षकों एवं सहयोगियों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से कहानी के पात्रों को जीवंत कर दिया। प्रस्तुति में श्री सुमन भगत (संकुल समन्वयक), श्री उज्ज्वल वैष्णव, श्री कोमल चंद साहू, श्री संदीप कुमार भगत, श्री विवेक लकड़ा, श्रीमती अल्पना देवी, श्री अजय भगत, श्री देवेश प्रधान, श्री हरीश कुमार महंत तथा कूबड़ीथान की आंगनवाड़ी सहायिका श्रीमती अनुरूपा कुजूर ने अपनी सशक्त अभिनय प्रतिभा से दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। कलाकारों की संवाद अदायगी, मंच अनुशासन एवं भावाभिव्यक्ति ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में नाट्य मंचन के साथ-साथ साहित्यिक प्रस्तुतियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहीं। एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर (अंग्रेजी साहित्य) की छात्रा कुमारी वस्फी सिद्धिकी ने अपनी स्वरचित कविता का प्रभावशाली पाठ कर खूब सराहना बटोरी। वहीं बी.एससी. पंचम सेमेस्टर की छात्रा ललिता यादव ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से सभी को प्रभावित किया। जिरहुल यूथ ग्रुप के अंकित गुप्ता ने भी अपनी रचनात्मक प्रस्तुति से कार्यक्रम को नई ऊँचाई प्रदान की, जिसे उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।

कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं गरिमामय मंच संचालन सहायक प्राध्यापक श्री गौतम सूर्यवंशी ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को क्रमबद्ध एवं रोचक ढंग से संचालित करते हुए प्रत्येक वक्ता, कलाकार एवं प्रस्तुति का सुंदर परिचय कराया।

अंत में हिन्दी विभाग अध्यक्ष सहायक प्राध्यापक सुश्री कीर्ति किरण केरकेट्टा ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, कलाकारों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, अंजीम प्रेम जी फाउंडेशन, मनोरा विकासखंड के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि साहित्य और रंगमंच समाज में संवेदनशीलता, न्याय और मानवीय मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम हैं।

कार्यक्रम के समापन पर पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। विद्यार्थियों ने न केवल मुंशी प्रेमचंद के साहित्य को निकट से समझा, बल्कि न्याय, निष्पक्षता, मित्रता, कर्तव्य और मानवीय संवेदनाओं के अमूल्य संदेश को भी आत्मसात किया। यह आयोजन प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक अत्यंत सफल, प्रेरणादायी एवं यादगार साहित्यिक आयोजन सिद्ध हुआ।

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