गुरु-शिष्य के आत्मीय संबंधों से सराबोर हुआ कोड़लिया स्कूल
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोड़लिया में हर्षोल्लास से मनाया गया शिक्षक दिवस, विद्यार्थियों ने दी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कोड़लिया। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोड़लिया में शिक्षक दिवस का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरा विद्यालय परिसर गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध, सम्मान, संस्कार और शिक्षा के महत्व के संदेश से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के छायाचित्र के समक्ष विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा दीप एवं अगरबत्ती प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा के प्रति समर्पण एवं उनके आदर्शों को स्मरण करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षक दिवस मनाने के उद्देश्य एवं महत्व से अवगत कराया गया।
अनुशासन और संस्कार ही सफलता की नींव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान पाठक श्रीमती मधुमति चौहान ने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, संस्कार एवं निरंतर प्रयास के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। यदि विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन करें, अनुशासन का पालन करें और अपने शिक्षकों एवं माता-पिता का सम्मान करें, तो वे जीवन में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
श्री संजय राम, शिक्षक एवं संकुल शैक्षिक समन्वयक ने शिक्षक की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने एक अच्छे शिक्षक के गुणों तथा गुरु के मार्गदर्शन के महत्व को विद्यार्थियों के सामने सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों को उनके कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का कराया बोध
श्री अनिल कुमार मिश्रा, शिक्षक ने विद्यार्थियों को उनके कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों की जानकारी देते हुए कहा कि एक विद्यार्थी का सबसे बड़ा दायित्व मन लगाकर पढ़ाई करना और अपने विद्यालय, परिवार एवं समाज का नाम रोशन करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने तथा अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में श्री मनीष कुमार, प्रधान शिक्षक ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन, व्यक्तित्व एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि डॉ. राधाकृष्णन का संपूर्ण जीवन शिक्षा एवं ज्ञान के प्रति समर्पित रहा। उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना देश में शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है।
गुरु के मार्गदर्शन से बनता है विद्यार्थी का भविष्य
सुश्री ऋचा शर्मा, शिक्षक ने गुरु एवं शिष्य के बीच ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन के महत्व को समझाते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने की दिशा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
वहीं श्री शंभू चरण धीरही, सहायक शिक्षक ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के महत्व तथा शिक्षा की भूमिका के संबंध में प्रेरणादायी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे सशक्त माध्यम है। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ समाज एवं देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
शिक्षक दिवस समारोह के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, उत्साह एवं आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित शिक्षकों एवं साथियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ साझा की खुशियां
शिक्षक दिवस के इस विशेष अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से खीर, पूरी, जलेबी, केला एवं अन्य मिष्ठान की व्यवस्था की गई। शिक्षकों ने स्वयं बच्चों को भोजन एवं मिष्ठान खिलाकर उनके साथ खुशियां साझा कीं। इस आत्मीय पहल से विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। गुरु और शिष्य के बीच स्नेह, अपनत्व और आत्मीयता का यह दृश्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।
अच्छे संस्कारों के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कारों से युक्त, अनुशासित, संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, स्वच्छता, समयपालन एवं बड़ों के सम्मान को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
समापन अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों ने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदारी एवं समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोड़लिया में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह शिक्षा, संस्कार, प्रतिभा और गुरु-शिष्य के आत्मीय संबंधों का सुंदर संगम बनकर सामने आया। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता, शिक्षकों का मार्गदर्शन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, शिक्षा के महत्व और जीवन में अच्छे संस्कारों की उपयोगिता को समझने का प्रेरणादायी अवसर भी रहा।


